
NDS - New Diet system channel
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View on Telegram*" सूत्र सुखमय जीवन का "*
केवल मानव जन्म मिल जाना ही पर्याप्त नहीं है अपितु हमें जीवन जीने की कला आनी भी आवश्यक है। पशु- पक्षी तो बिल्कुल भी संग्रह नहीं करते फिर भी भी उन्हें इस प्रकृति द्वारा जीवनोपयोगी सब कुछ प्राप्त हो जाता है।
आनन्द साधन से नहीं साधना से प्राप्त होता है। आंनद भीतर का विषय है, तृप्ति आत्मा का विषय है। मन को कितना भी मिल जाए , यह अपूर्णता का बार - बार अनुभव कराता रहेगा। जो अपने भीतर तृप्त हो गया उसे बाहर के अभाव कभी परेशान नहीं करते।
जीवन तो बड़ा आनंदमय है लेकिन हम अपनी इच्छाओं के कारण, अपनी वासनाओं के कारण इसे कष्टप्रद और क्लेशमय बनाते हैं। केवल संग्रह के लिए जीने की प्रवृत्ति ही जीवन को कष्टमय बनाती है। जिसे इच्छाओं को छोड़कर आवश्यकताओं में जीना आ गया, समझो उसे सुखमय जीवन का सूत्र भी समझ आ गया।
यदि जो हम प्रकृति की ओर नज़र डाले तो हमे पता चल ही जाता है की,प्रकृति के सहारे जीने वाला कोई भी पशु या पक्षी बीमार है ही नही।
और प्रकृति का अनादर करने वाला इंसान चाहे कितना भी पढ़ा लिखा,या कितना भी बड़ा ,या कितना भी महान संत ही क्यों न हो,शायद ही कोई स्वस्थ होगा।
कोई घर आपको ऐसा नहीं मिलेगा शायद की उनके घर में दवाई न आती हो।
आखिर क्यों,क्यों ,क्यों????
तो आइए ये जो " एडवांस नई भोजन प्रथा" क्या है? इसे समझिए,और न सिर्फ समझिए बल्कि अपने जीवन में अपनाइए और एक स्वस्थ मस्त और तंदुरस्त जीवन जिएं।
पहला सुख निरोगी काया
🙏🌹जय तंदुरस्ती🌹🙏
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Jul 31, 09:02 AM
308
*" सूत्र सुखमय जीवन का "*
केवल मानव जन्म मिल जाना ही पर्याप्त नहीं है अपितु हमें जीवन जीने की कला आनी भी आवश्यक है। पशु- पक्षी तो बिल्कुल भी संग्रह नहीं करते फिर भी भी उन्हें इस प्रकृति द्वारा जीवनोपयोगी सब कुछ प्राप्त हो जाता है।
आनन्द साधन से नहीं साधना से प्राप्त होता है। आंनद भीतर का विषय है, तृप्ति आत्मा का विषय है। मन को कितना भी मिल जाए , यह अपूर्णता का बार - बार अनुभव कराता रहेगा। जो अपने भीतर तृप्त हो गया उसे बाहर के अभाव कभी परेशान नहीं करते।
जीवन तो बड़ा आनंदमय है लेकिन हम अपनी इच्छाओं के कारण, अपनी वासनाओं के कारण इसे कष्टप्रद और क्लेशमय बनाते हैं। केवल संग्रह के लिए जीने की प्रवृत्ति ही जीवन को कष्टमय बनाती है। जिसे इच्छाओं को छोड़कर आवश्यकताओं में जीना आ गया, समझो उसे सुखमय जीवन का सूत्र भी समझ आ गया।
यदि जो हम प्रकृति की ओर नज़र डाले तो हमे पता चल ही जाता है की,प्रकृति के सहारे जीने वाला कोई भी पशु या पक्षी बीमार है ही नही।
और प्रकृति का अनादर करने वाला इंसान चाहे कितना भी पढ़ा लिखा,या कितना भी बड़ा ,या कितना भी महान संत ही क्यों न हो,शायद ही कोई स्वस्थ होगा।
कोई घर आपको ऐसा नहीं मिलेगा शायद की उनके घर में दवाई न आती हो।
आखिर क्यों,क्यों ,क्यों????
तो आइए ये जो " एडवांस नई भोजन प्रथा" क्या है? इसे समझिए,और न सिर्फ समझिए बल्कि अपने जीवन में अपनाइए और एक स्वस्थ मस्त और तंदुरस्त जीवन जिएं।
पहला सुख निरोगी काया
🙏🌹जय तंदुरस्ती🌹🙏
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Jul 28, 04:00 AM
379
भगवद् गीता के अध्याय 17 के श्लोक 8 में लिखा है, 'आयुः सत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धानाः'. (रस्या: स्थिरारिधा आहारा सात्विक प्रिया:।।)इसका मतलब है कि सत्वगुणों वाले लोग ऐसे भोजन को पसंद करते हैं जिससे आयु, सद्गुण, शक्ति, स्वास्थ्य, प्रसन्नता, और संतोष बढ़ता है. ऐसे भोजन रसीले, स्वादिष्ट, पौष्टिक, और प्राकृतिक होते हैं.
यह श्लोक में दी गई सात्विक भोजन (जो रसीला हो और प्राकृतिक भी हो) कि परिभाषा में केवल फल सब्जियां कंदमूल ही आता हैं बाकी सभी प्रकार के सुखे मेवे अनाज बिगैरा प्राकृतिक तो हैं लेकिन रसीले नहीं होते और उसे चूल्हे पे पकाके रसीले बनाते है तो वह प्राकृतिक नहीं रहते विकृत हो जाते हैं इसलिए सबसे उत्तम सात्विक आहार फलम पत्रम् पुष्पम तोयम यानी फल फूल पत्ते सब्जियां और पानी ही है।
अब याद करिए अध्याय 9 श्लोक 26 पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति | तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन: ||
हमारा अनुभव भी यही बोलता है विश्वभर के NDS साधकों का हो या फिर रॉ वेगन लोगों का भी यही अनुभव है जो सिर्फ़ फल सब्जियां पर रहकर आधी व्याधि उपाधियों से मुक्त हुए हैं । अगर सब धर्म के लोग अपने अपने धर्मग्रंथों का सही अर्थ समझ गए तो दुनिया में 99% लोग रोग, रागद्वेष दुःख से मुक्त हो जाएंगे।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।
सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।
(Fruit juices are cleansers whereas Vegetable Juices are immunity boosters)👍💐🙏
Jul 28, 04:00 AM
356
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Jul 27, 09:49 PM
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*Diebetes / शुगर*
एक भयंकर सच.. जानिये.!
लूट मचाने के लिए दवा कंपनियाँ किस हद तक गिर सकती आप अनुमान भी नहीं लगा सकते,
अभी कुछ समय पूर्व स्पेन मे शुगर की दवा बेचने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियो की एक बैठक हुई है, दवाओ की बिक्री बढ़ाने के लिए एक सुझाव दिया गया है कि अगर शरीर मे सामान्य शुगर का मानक 120 से कम कर 100 कर दिया जाये तो शुगर की दवाओं की बिक्री 40 % तक बढ़ जाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दूँ बहुत समय पूर्व शरीर मे सामान्य शुगर का मानक 160 था दवाओ की बिक्री बढ़ाने के लिए ही इसे कम करते-करते 120 तक लाया गया है जिसे भविष्य मे 100 तक करने की संभावना है।
ये एलोपेथी दवा कंपनियाँ लूटने के लिए किस स्तर तक गिर सकती है ये इसका जीता जागता उदाहरण है आज मैडीकल साईंस के अनुसार शरीर मे सामान्य शुगर का मानक 80 से 120 है।
अब मान लो दवा कंपनियो के साथ मिलीभगत कर इन्होने कुछ फर्जी शोध की आड़ मे नया मानक 70 से 100 तय कर दिया, अब अच्छा भला व्यक्ति शुगर टेस्ट करवाये और शुगर का सतर 100 से 110 के बीच आए, तो डाक्टर आपको शुगर का रोगी घोषित कर देगा,
भय के कारण आप शुगर की एलोपेथी दवाएं लेना शुरू कर देंगे, अब शुगर तो पहले से सामान्य थी आपने जो भय के कारण शुगर कम करने की दवा ली तो उल्टा शरीर मे और कमजोरी महसूस होने लगेगी ,
और आप फिर इस अंधी खाई मे गिरते चले जाएंगे।
और मान लो आप जैसे 2 -3 करोड़ लोग भी इस
साजिश का शिकार हुए तो ये एलोपेथी दवा कंपनियाँ लाखो करोड़ का व्यापार कर डालेंगी।
एक नंगा सच.. जानिये.! क्या आप जानते हैं.............
1997 से पहले fasting diebetes की limit 140 थी।
फिर fasting sugar की limit 126 कर दी गयी।
इससे world population में 14% diebetec लोग अचानक बढ़ गए।
उसके बाद 2003 में WHO ने फिर से fasting sugar की limit कम करके 100 कर दी।
याने फिर से total population के करीबन 70% लोग diebetec माने जाने लगे।
दरअसल diebetes ratio या limit तय करने वाली कुछ pharmaceutical कंपनियां थीं जो WHO को घूस खिलाकर अपने व्यापार को बढ़ाने के लिये ये सब करवा रही थीं।
और अपना बिज़नेस बढ़ाने के लिए ये किया जाता रहा।
लेकिन क्या आपको पता है कि
हकीकत में डायबिटीज को कैसे जांचना चाहिए ?
कैसे पता चलेगा कि आप डायबिटीज के शिकार हैं भी या नहीं ?
पुराने जमाने के इलाज़ के हिसाब से
डायबिटीज चेक करने का एक सरल उपाय है ---
आप की उम्र और + 100
जी हाँ
यही एक सचाई है
अगर आपकी उम्र 65 है तो आपका सुगर लेवल खाने के बाद 165 होना चाहिये।
अगर आपकी age 75 है तो आपका नॉर्मल सुगर लेवेल खाने के बाद 175 होना चाहिए।
अगर ऐसा है तो इसका मतलब आपको डायबिटीज नहीं है।
ये होता है age के हिसाब से यानी..
So now you can count your diebetec limit as 100 + your age.
अगर आपकी उम्र 80 है तो फिर आपकी डायबिटिक लिमिट खाने के बाद 180 काउंट की जानी चाहिये।
मतलब अगर आपका सुगर लेवल इस उम्र में भी 180 है तो आप डायबिटिक नहीं हैं।
आपकी गिनती नॉर्मल इंसान जैसी होनी चाहिये।
लेकिन W.H.O. को अपने कॉन्फिडेंस में लेकर बहुत सारी फार्मा कम्पनियों ने अपने व्यापार के लिये सुगर लेवेल में उथल पुथल कर दी और आम जनता उस चक्रव्यूह में फंस गई।
No Doctor can guide u.
No one will advice u.
But its a bitter truth.!
उसके साथ साथ एक सच ये भी है कि --
अगर आपकी पाचन शक्ति उत्तम है तो आपको कोई टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है
या फिर आप अपने जीवन में कोई टेंशन नहीं लेते।
आप अच्छा खाना खाते हो
आप जंक फूड, ज्यादा मसालेदार या तैलीय भोजन या फ़्राईड फूड नहीं खाते
आप रेगुलर योगा या कसरत करते हैं
और आपका वजन आपकी हाइट के हिसाब के बराबर है
तो आपको डायबिटीज हो ही नहीं सकती।
यही सत्य है, बस टेंशन न लें अच्छा खाना खाएं, एक्सरसाइज करते रहें।
पोस्ट को शेयर करना मत भूलिए .... जागो और दूसरों को जगाओ !
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Feb 18, 08:22 AM
2.19K
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